sufi tadka
रविवार, 13 नवंबर 2016
बन्दगी का यही तो दस्तूर है,
मन पहले होता यूं चूर चूर है,
तप के लाल जब हुये सुखरू,
जिंदगी में आता तब सरूर है। रैना"
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