यही कुछ बोलते खण्डर ज़रा चलना संभल के तुम,
पड़े जब वक़्त की लाठी नहीं सालिम रहे कोई। रैना"
न रिश्तों से शिकायत है जमाना हो गया ऐसा,
ठिकाना दिल करे बदली नये इस दौर का फैशन।रैना"
पड़े जब वक़्त की लाठी नहीं सालिम रहे कोई। रैना"
न रिश्तों से शिकायत है जमाना हो गया ऐसा,
ठिकाना दिल करे बदली नये इस दौर का फैशन।रैना"
Khubsurat
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