शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

वैष्णो माँ की जय जय माँ 
तलब है तेरे दर्शन की इक बार तो झलक दिखा दे माँ,
इक मुद्दत से हम भटक रहे मन की प्यास बुझा दे माँ,
माँ वैष्णो हम पे रहम करो मन को करार मिल जाये,
बीच मझदार किश्ती डोल रही भव से पार लगा दे माँ। रैना"
सुप्रभात जी ----------------------------जय जय माँ  

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