sufi tadka
सोमवार, 17 अक्टूबर 2016
बाकमाल है अन्दाज आप ,का,
इक जर्रे को पलकों पे सजा लिया। रैना"
बेशक हम इस काबिल हरगिज न थे,
आप ने जर्रे को आफ़ताब कर दिया। .रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें