sufi tadka
मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016
बदले तेरे मिजाज देख रहा हूं,
बहके तेरे अंदाज देख रहा हूं,
है बेखबर तुझे न
है हद करी यकीन कौन करेगा,
वैसे मैं दिल को रोकता रहता हूं,
अर्श को भेदने की सोचता रहता हूं,
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