दोस्तों आप को समर्पित मेरी रचना
जिन्दगी को संग निभाना नही आया,
प्यार से गाना वो तराना नही आया।
हम लुटा के सब रहे हाथ खाली से,
रास हमको ये जमाना नही आया।
अश्क छलके देख कोई सनम अपना,
दर्द दिल का भी छुपाना नही आया।
भूल जाना था मगर हम नही भूले,
याद कोई भी बहाना नही आया।
दूर तक जाती नजर बस तुझे ढूंढती,
याद तुझको वो फ़साना नही आया।
सब लगे फन्दे लगाने में यहां अब तो,
अब किसी को भी बचाना नही आया।
रात होने को हुई कुछ सोच ले रैना",
सो रहा खुद को जगाना नही आया। रैना"
जिन्दगी को संग निभाना नही आया,
प्यार से गाना वो तराना नही आया।
हम लुटा के सब रहे हाथ खाली से,
रास हमको ये जमाना नही आया।
अश्क छलके देख कोई सनम अपना,
दर्द दिल का भी छुपाना नही आया।
भूल जाना था मगर हम नही भूले,
याद कोई भी बहाना नही आया।
दूर तक जाती नजर बस तुझे ढूंढती,
याद तुझको वो फ़साना नही आया।
सब लगे फन्दे लगाने में यहां अब तो,
अब किसी को भी बचाना नही आया।
रात होने को हुई कुछ सोच ले रैना",
सो रहा खुद को जगाना नही आया। रैना"
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