असर उल्फत का कम नही होता,
आशिक मर के भी बेदम नही होता.
खुदा ने बख्शी है तौफिक ही ऐसी,
गम में रह के भी गम नही होता.
कोई तो मज़बूरी जरुर रही होगी,
यूँ तो कोई बेवफा सनम नही होता.
आशिक मरते नही है अमर होते,
उनका दुबारा जन्म नही होता.
वो औरों पे करते नजरे इनायत,
मगर "रैना"पर उनका कर्म नही होता. "रैना"
बुधवार, 22 दिसंबर 2010
शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010
galt
सरे महफिल में चर्चा यही है,
कोई तुझ सा हसीन नही है.
तेरे पास खजाना हुस्न का,
तुझ से नूर की गंगा बही है.
मै करू जो गलत हो साबित,
तूं करे जो वही तो सही है.
जिस में न असर हो जी तेरा,
ऐसी शै कोई बनी ही नही है.
उसकी तारिफ करना मुश्किल,
"रैना" तुने ये सच्च ही कही है. "रैना"
कोई तुझ सा हसीन नही है.
तेरे पास खजाना हुस्न का,
तुझ से नूर की गंगा बही है.
मै करू जो गलत हो साबित,
तूं करे जो वही तो सही है.
जिस में न असर हो जी तेरा,
ऐसी शै कोई बनी ही नही है.
उसकी तारिफ करना मुश्किल,
"रैना" तुने ये सच्च ही कही है. "रैना"
hasin
सरे महफिल में चर्चा यही है,
कोई तुझ सा हसीन नही है.
तेरे पास खजाना हुस्न का,
तुझ से नूर की गंगा बही है.
मै करू जो गलत हो साबित,
तूं करे जो वही तो सही है.
जिस में न असर हो जी तेरा,
ऐसी शै कोई बनी ही नही है.
उसकी तारिफ करना मुश्किल,
"रैना" तुने ये सच्च ही कही है. "रैना"
कोई तुझ सा हसीन नही है.
तेरे पास खजाना हुस्न का,
तुझ से नूर की गंगा बही है.
मै करू जो गलत हो साबित,
तूं करे जो वही तो सही है.
जिस में न असर हो जी तेरा,
ऐसी शै कोई बनी ही नही है.
उसकी तारिफ करना मुश्किल,
"रैना" तुने ये सच्च ही कही है. "रैना"
मंगलवार, 14 दिसंबर 2010
चुपके चुपके दिल
तुझ से बिछुड़े नैनों को न भिगोया है,
मगर चुपके चुपके दिल बहुत रोया है.
दागे इश्क अब तक भी नही है छूटे,
दिल को कई बार अश्कों से धोया है.
मै भी सोये नसीबा को जगा ही लेता,
मगर जगाऊ कैसे वो जगता हुआ सोया है.
इश्क में कुछ भी नही हुआ है हासिल,
दिल का आराम चैन हमने खोया है.
आज फिर उनकी याद है चली आई,
तन्हाई गले लगा के "रैना" खूब रोया है
राजिंदर "रैना"
मगर चुपके चुपके दिल बहुत रोया है.
दागे इश्क अब तक भी नही है छूटे,
दिल को कई बार अश्कों से धोया है.
मै भी सोये नसीबा को जगा ही लेता,
मगर जगाऊ कैसे वो जगता हुआ सोया है.
इश्क में कुछ भी नही हुआ है हासिल,
दिल का आराम चैन हमने खोया है.
आज फिर उनकी याद है चली आई,
तन्हाई गले लगा के "रैना" खूब रोया है
राजिंदर "रैना"
रविवार, 12 दिसंबर 2010
बुरा दौर चल रहा है
बुरा दौर चल रहा है खुद को सम्भाले रखना,
आँखे खुली हो लेकिन होठों पे ताले रखना.
है परेशानियों का मौसम यौवन पे तंगहाली,
तूं मन न छोटा करना उम्मीदें पाले रखना. "रैना"
आँखे खुली हो लेकिन होठों पे ताले रखना.
है परेशानियों का मौसम यौवन पे तंगहाली,
तूं मन न छोटा करना उम्मीदें पाले रखना. "रैना"
शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010
सारा जहाँ तेरा फिर भी न कोई घर है,
बेघर तूं बड़ा जादूगर है. ओं जादूगर
ओं जादूगर ----------
तूं ऊँचा अर्श से भी उच्चाईयों तक,
तूं गहरा सागर से भी गहराइयों तक,
तेरा अजब असर है परछाइयों तक,
तूं है मातम में भी शहनाइयों तक,
तूं ही हसरत की है अंगड़ाइयों तक,
तूं ग़ज़ल में है तो रुबाइयों तक,
तूं वफादारों में है हरजाइयों तक,
तूं दुश्मन तक है हमराहियो तक,
हर शै में बस तेरा ही असर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
जादूगर तूं जादूगर-------------
इस दुनिया के हर रंग में तूं
आये नजर नही हर ढंग में तूं,
हर शै के पहलू संग में तूं,
सागर में तूं है तरंग में तूं,
अमन शांति और जंग में तूं,
उदंड में मस्त मलंग में तूं,
डोर में तूं है पतंग में तूं,
.इंद्र धुनष सतरंग में तूं,
सीलाजीत और भंग में तूं,
सर्व व्यापक ये तेरी नजर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
ओं जादूगर ------------- राजिंदर "रैना".
बेघर तूं बड़ा जादूगर है. ओं जादूगर
ओं जादूगर ----------
तूं ऊँचा अर्श से भी उच्चाईयों तक,
तूं गहरा सागर से भी गहराइयों तक,
तेरा अजब असर है परछाइयों तक,
तूं है मातम में भी शहनाइयों तक,
तूं ही हसरत की है अंगड़ाइयों तक,
तूं ग़ज़ल में है तो रुबाइयों तक,
तूं वफादारों में है हरजाइयों तक,
तूं दुश्मन तक है हमराहियो तक,
हर शै में बस तेरा ही असर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
जादूगर तूं जादूगर-------------
इस दुनिया के हर रंग में तूं
आये नजर नही हर ढंग में तूं,
हर शै के पहलू संग में तूं,
सागर में तूं है तरंग में तूं,
अमन शांति और जंग में तूं,
उदंड में मस्त मलंग में तूं,
डोर में तूं है पतंग में तूं,
.इंद्र धुनष सतरंग में तूं,
सीलाजीत और भंग में तूं,
सर्व व्यापक ये तेरी नजर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
ओं जादूगर ------------- राजिंदर "रैना".
मुझे अब लगता है
मुझे अब लगता है ऐसा, के हम तो हार ही जाये गे,
यूँ ही फिर काटे गे चक्कर जिन्दगी सवांर न पाये गे.
बेशक हंसते है ये लव मगर गम दिल में तो काफी है,
भला इन गम के कहरों से कैसे खुद को बचाये गे.
ये मुझ से न कभी पूछो के दिल में दर्द है कितना,
तौहीन यार की होगी जो हम दर्दे दिल सुनाये गे.
तेरी तस्वीर मेरे जाना मैंने मन मंदिर में है रखी,
यही अब जोत तो जलती है उसे कभी न हटाये गे.
खफा तूं मुझे लगता है जो सुनता नही मेरे दिल की.
हम भी अब रो रो के तुझ को अपना दुखड़ा बताये गे.
कही तुने फिर भी न मानी पागल "रैना" ये कर जाये,
यही सब छोड़ के सारा फिर तेरे घर ही आये गे. "रैना"
यूँ ही फिर काटे गे चक्कर जिन्दगी सवांर न पाये गे.
बेशक हंसते है ये लव मगर गम दिल में तो काफी है,
भला इन गम के कहरों से कैसे खुद को बचाये गे.
ये मुझ से न कभी पूछो के दिल में दर्द है कितना,
तौहीन यार की होगी जो हम दर्दे दिल सुनाये गे.
तेरी तस्वीर मेरे जाना मैंने मन मंदिर में है रखी,
यही अब जोत तो जलती है उसे कभी न हटाये गे.
खफा तूं मुझे लगता है जो सुनता नही मेरे दिल की.
हम भी अब रो रो के तुझ को अपना दुखड़ा बताये गे.
कही तुने फिर भी न मानी पागल "रैना" ये कर जाये,
यही सब छोड़ के सारा फिर तेरे घर ही आये गे. "रैना"
मंगलवार, 30 नवंबर 2010
बढ़ती दूरियां
ये बढ़ती दूरियां घटाने की बात करे,
मिल बैठ मसले सुलझाने की बात करे.
सुबह की रंगोली और गीतों भारी शाम,
आओ फिर वो माहौल बनाने की बात करे,
किस्मत के मारे जो गिर गये है राहों में,
उन बेचारों लाचारों को उठाने की बात करे,
बल्ब जल रहे फिर भी घोर अँधेरा लगता,
आओ दिल के चिराग़ जलाने की बात करे.
देखिये तो हर तरफ दुर्गन्ध का आलम है,
अब वातावरण को महकाने की बात करे.
जिनकी आँखों पे चढ़ गेई है चर्बी देखों,
आओ उन्हें आइना दिखाने की बात करे
जो और बिखरे तो संभल नही पाए गे यारों
गिले शिकवे भूल एक हो जाने की बात करे.
बेवजह जो भटक गये है अपनी राहों से,
मान जाये गे उन्हें समझाने की बात करे.
वो हर जगह मौजूद हर शै में नूर उसका,
फिर भला क्यों मस्जिद,बुतखाने की बात करे.
बहुत रो लिये अब तो सुख गये है आंसूं देखो,
अब तो पागल "रैना" को हँसाने की बात करे.
राजिंदर "रैना"
मिल बैठ मसले सुलझाने की बात करे.
सुबह की रंगोली और गीतों भारी शाम,
आओ फिर वो माहौल बनाने की बात करे,
किस्मत के मारे जो गिर गये है राहों में,
उन बेचारों लाचारों को उठाने की बात करे,
बल्ब जल रहे फिर भी घोर अँधेरा लगता,
आओ दिल के चिराग़ जलाने की बात करे.
देखिये तो हर तरफ दुर्गन्ध का आलम है,
अब वातावरण को महकाने की बात करे.
जिनकी आँखों पे चढ़ गेई है चर्बी देखों,
आओ उन्हें आइना दिखाने की बात करे
जो और बिखरे तो संभल नही पाए गे यारों
गिले शिकवे भूल एक हो जाने की बात करे.
बेवजह जो भटक गये है अपनी राहों से,
मान जाये गे उन्हें समझाने की बात करे.
वो हर जगह मौजूद हर शै में नूर उसका,
फिर भला क्यों मस्जिद,बुतखाने की बात करे.
बहुत रो लिये अब तो सुख गये है आंसूं देखो,
अब तो पागल "रैना" को हँसाने की बात करे.
राजिंदर "रैना"
सोमवार, 29 नवंबर 2010
रेत के घर
उदास मन को कुछ ऐसे बहलाते है,
रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.
इश्क में तो हासिल होती रुसवाई,
समझदार लोग तो यही बताते है.
वो ही सुने गा तेरी फरियाद "रैना"
छोड़ सबको हम उसके घर जाते है.
राजिंदर "रैना"
रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.
इश्क में तो हासिल होती रुसवाई,
समझदार लोग तो यही बताते है.
वो ही सुने गा तेरी फरियाद "रैना"
छोड़ सबको हम उसके घर जाते है.
राजिंदर "रैना"
महफ़िल से अब तो नजारें चले गये,
दुःख सुख बाटतें थे वो प्यारे चले गये.
पर सुख की खोज को जंगल में भटकने,
दशरथ की आँखों के तारें चले गये.
मेरे दर्दे दिल की सुनी नही सदा,
हम उन्हें निरंतर पुकारे चले गये.
हादसे ने छीना बूढ़े की लाठी को,
बिलखता रोये बाप सहारे चले गये.
दिन निकला सारा आलम बदला,
अर्श तन्हा छोड़ सितारें चले गये.
किस्मत ने कई बार धोखा दिया,
फिर भी जिन्दगी सवारें चले गये.
"रैना" अब तो मिलने की आश छोड़ दी,
हम से रूठ के दोस्त हमारे चले गये.
राजिंदर "रैना"
दुःख सुख बाटतें थे वो प्यारे चले गये.
पर सुख की खोज को जंगल में भटकने,
दशरथ की आँखों के तारें चले गये.
मेरे दर्दे दिल की सुनी नही सदा,
हम उन्हें निरंतर पुकारे चले गये.
हादसे ने छीना बूढ़े की लाठी को,
बिलखता रोये बाप सहारे चले गये.
दिन निकला सारा आलम बदला,
अर्श तन्हा छोड़ सितारें चले गये.
किस्मत ने कई बार धोखा दिया,
फिर भी जिन्दगी सवारें चले गये.
"रैना" अब तो मिलने की आश छोड़ दी,
हम से रूठ के दोस्त हमारे चले गये.
राजिंदर "रैना"
सोमवार, 15 नवंबर 2010
बुधवार, 10 नवंबर 2010
रविवार, 7 नवंबर 2010
mai teri rja vich
mai ta teri rja vich raji,
bhave bna de bhave mita de,
bhave jis hal rkho mere shaji.
mai ta teri rja vich raji.......
ha raji mai ta teri rja vich raji-----------
bhave bna de bhave mita de,
bhave jis hal rkho mere shaji.
mai ta teri rja vich raji.......
ha raji mai ta teri rja vich raji-----------
गुरुवार, 19 अगस्त 2010
हम सब के लिए एक खास कविता जो मैंने आजादी दिवस के उपलक्ष में लिखी है इसे याद रखना है,
पेसे खिदमत है
बेशक अब तो खून हमारा होने लगा है पानी,
तभी तो हम सब भूल रहे है शहीदों की कुर्बानी.
याद करो उन्हें याद करो, भूलो न उनको याद करो,
आजादी के दीवानों को कुर्बां हुए परवानों को.
याद करो, याद करो --------------
धुप देखी न छावं देखी, न देखे पावँ के छाले,
बंदी माँ को मुक्त करवाने निकल पड़े थे मतवाले,
भूखे प्यासे आगे बढ़ते, भारी गम पर उफ़ न करते,
देश प्रेम की लगन थी लागी, हंस के लगा दी जान की बाजी.
याद करो उन्हें याद करो--------------
काल सुनहरी भरी जवानी, फिर भी मन की एक न मानी,
अपना सुख दुःख भूल भुला के, माँ की पीड़ा समझी जानी,
इच्छा अरमां कर के दफन, सर पर बांध लिया था कफन,
मचला खून सर चढ़ कर बोला, मैया रंग दे बसंती चोला.
याद करो उन्हें याद करो--------------
देख फंदे को मन था झुमा, हंस हंस के फांसी को चूमा,
वीरों का उत्साह देख कर दुश्मन का फिर सर था घुमा,
बेशक रोये बहन, माँ, भाई, हिम्मत में पर कमी न आई,
शहीदों की कुर्बानी रंग लाई, अंग्रेजों ने मुहु की खाई,
15 अगस्त का दिन फिर आया, लाल किले पर तिरंगा फहराया,
शहीदों ने उदघोष किया, भारत माँ की जय, भारत माँ की जय----
याद करो उन्हें याद करो, भूलो न उन्हें याद करो------------
राजिंदर "रैना"
पेसे खिदमत है
बेशक अब तो खून हमारा होने लगा है पानी,
तभी तो हम सब भूल रहे है शहीदों की कुर्बानी.
याद करो उन्हें याद करो, भूलो न उनको याद करो,
आजादी के दीवानों को कुर्बां हुए परवानों को.
याद करो, याद करो --------------
धुप देखी न छावं देखी, न देखे पावँ के छाले,
बंदी माँ को मुक्त करवाने निकल पड़े थे मतवाले,
भूखे प्यासे आगे बढ़ते, भारी गम पर उफ़ न करते,
देश प्रेम की लगन थी लागी, हंस के लगा दी जान की बाजी.
याद करो उन्हें याद करो--------------
काल सुनहरी भरी जवानी, फिर भी मन की एक न मानी,
अपना सुख दुःख भूल भुला के, माँ की पीड़ा समझी जानी,
इच्छा अरमां कर के दफन, सर पर बांध लिया था कफन,
मचला खून सर चढ़ कर बोला, मैया रंग दे बसंती चोला.
याद करो उन्हें याद करो--------------
देख फंदे को मन था झुमा, हंस हंस के फांसी को चूमा,
वीरों का उत्साह देख कर दुश्मन का फिर सर था घुमा,
बेशक रोये बहन, माँ, भाई, हिम्मत में पर कमी न आई,
शहीदों की कुर्बानी रंग लाई, अंग्रेजों ने मुहु की खाई,
15 अगस्त का दिन फिर आया, लाल किले पर तिरंगा फहराया,
शहीदों ने उदघोष किया, भारत माँ की जय, भारत माँ की जय----
याद करो उन्हें याद करो, भूलो न उन्हें याद करो------------
राजिंदर "रैना"
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