सोमवार, 29 नवंबर 2010

  महफ़िल से अब तो नजारें चले गये,
दुःख सुख बाटतें थे वो प्यारे चले गये.
पर सुख की खोज को जंगल में भटकने,
दशरथ की आँखों  के तारें चले गये.
मेरे दर्दे दिल की सुनी नही सदा,
हम उन्हें निरंतर पुकारे चले गये.
हादसे ने छीना बूढ़े की लाठी को,
बिलखता रोये बाप सहारे चले गये.
दिन निकला  सारा आलम बदला,
अर्श तन्हा छोड़ सितारें  चले गये.
किस्मत ने कई बार धोखा दिया,
फिर भी  जिन्दगी सवारें चले गये.
"रैना" अब तो मिलने की आश छोड़ दी,
हम से रूठ के दोस्त हमारे चले गये.
राजिंदर "रैना"

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