उदास मन को कुछ ऐसे बहलाते है,
रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.
इश्क में तो हासिल होती रुसवाई,
समझदार लोग तो यही बताते है.
वो ही सुने गा तेरी फरियाद "रैना"
छोड़ सबको हम उसके घर जाते है.
राजिंदर "रैना"
"मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
जवाब देंहटाएंमगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है"
बहुत खूब
बहुत सुन्दर रचना| धन्यवाद|
जवाब देंहटाएंइस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
जवाब देंहटाएं" भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप, आपके परिवार तथा इष्टमित्रो को होली की हार्दिक शुभकामना. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
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