सारा जहाँ तेरा फिर भी न कोई घर है,
बेघर तूं बड़ा जादूगर है. ओं जादूगर
ओं जादूगर ----------
तूं ऊँचा अर्श से भी उच्चाईयों तक,
तूं गहरा सागर से भी गहराइयों तक,
तेरा अजब असर है परछाइयों तक,
तूं है मातम में भी शहनाइयों तक,
तूं ही हसरत की है अंगड़ाइयों तक,
तूं ग़ज़ल में है तो रुबाइयों तक,
तूं वफादारों में है हरजाइयों तक,
तूं दुश्मन तक है हमराहियो तक,
हर शै में बस तेरा ही असर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
जादूगर तूं जादूगर-------------
इस दुनिया के हर रंग में तूं
आये नजर नही हर ढंग में तूं,
हर शै के पहलू संग में तूं,
सागर में तूं है तरंग में तूं,
अमन शांति और जंग में तूं,
उदंड में मस्त मलंग में तूं,
डोर में तूं है पतंग में तूं,
.इंद्र धुनष सतरंग में तूं,
सीलाजीत और भंग में तूं,
सर्व व्यापक ये तेरी नजर है.
बेघर तूं बड़ा ही जादूगर है.
ओं जादूगर ------------- राजिंदर "रैना".
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