मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

चुपके चुपके दिल

तुझ से बिछुड़े नैनों को न भिगोया है,


मगर चुपके चुपके दिल बहुत रोया है.

दागे इश्क अब तक भी नही है छूटे,

दिल को कई बार अश्कों से धोया है.

मै भी सोये नसीबा को जगा ही लेता,

मगर जगाऊ कैसे वो जगता हुआ सोया है.

इश्क में कुछ भी नही हुआ है हासिल,

दिल का आराम चैन हमने खोया है.

आज फिर उनकी याद है चली आई,

तन्हाई गले लगा के "रैना" खूब रोया है

राजिंदर "रैना"

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