असर उल्फत का कम नही होता,
आशिक मर के भी बेदम नही होता.
खुदा ने बख्शी है तौफिक ही ऐसी,
गम में रह के भी गम नही होता.
कोई तो मज़बूरी जरुर रही होगी,
यूँ तो कोई बेवफा सनम नही होता.
आशिक मरते नही है अमर होते,
उनका दुबारा जन्म नही होता.
वो औरों पे करते नजरे इनायत,
मगर "रैना"पर उनका कर्म नही होता. "रैना"
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