शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

जीते जी माँ बाप को पानी पिलाने से भी गुरेज रही,
मरने के बाद श्रद्धाओं में देशी घी के पकवान खिला रहे। रैना"


बुधवार, 6 सितंबर 2017

लगी मतलब की बीमारी न कोई प्यार करता है,
जिसे चलना सिखाया हो वही तकरार करता है,
हुई इन्सान की फितरत वफ़ा से दूर रहता है,
मिले है जब कभी मौका तो पीठ पे वार करता है। रैना"
सुप्रभात जी ----------------------------- जय जय माँ

सोमवार, 4 सितंबर 2017

यही फितरत रही सब की कमी देखे नहीं अपनी,
हुआ इन्सान अब ऐसा मुहब्बत भूल बैठा है। रैना"


रविवार, 3 सितंबर 2017

देख तुझको सोचता रहता,
दिल मेरा तो रोकता रहता।
खेल मत तू इश्क की बाजी,
खुद ही खुद को टोकता रहता।
वो नज़र आता नहीं मुझको,
कौन मुझ में बोलता रहता।
क्या पता तेरा बता मुझको,
मैं हवा से पूछता रहता।
कुछ करे तो क्या यही सोचे,
खून अक्सर खोलता रहता।
भार अपना तोल ले रैना"
हर किसी को तोलता रहता। रैना"




गुरुवार, 31 अगस्त 2017

आज के लोग पर्दा हटाते नही हैं,
बात दिल की मगर बताते नही हैं। 
दिल में लगा रखते अक्सर गांठें,
दावा करते कुछ भी छुपाते नही।
जो हमारा हम तो उसके हैं यारों,
यूं बेवजह हम ताली बजाते नही।
ऐसे रुठे के तोड़ दिया है रिश्ता,
अब तो ख्वाबों में भी आते नही।
बरसात में परेशान चिड़िया सोचे,
गिरते घर में घोसला बनाते नही।
निकल जाते जो अंजान सफर पे,
वो मुसाफिर लौट के आते नही।
उसकी ख़ुशी में ही अपनी ख़ुशी,
"रैना" दिल को हम जलाते नही। रैना" 

सोमवार, 21 अगस्त 2017

दोस्तों बहुत दिनों बाद???
 आप के लिए कुछ खास

सरे महफ़िल में चर्चा यही है,
हसीं तुझ सा तो कोई नही है।
करें तारीफ़ तेरी दिवानें,
तुझी से नूर की गंग बही है।
करू मैं जो हुआ गल्त साबित,
करे तू जो वही तो सही है।
असर तेरा न हो जो किसी पे,
ऐसी शै तो न कोई बनी है।
तुझे पाना न आसान होता,
किसी ने बात ये सच कही है।
लगी रैना"तलब दीद करने,
ख़बर तुझको न हद ही करी है। रैना"


गुरुवार, 10 अगस्त 2017

दोस्तों के लिए खास पेशकश
ग़ज़ल
खैर मांगे तू ख़ुशी मेरे खुदा दे दे,
गम अगर देना जमाने से जुदा दे दे।
सांस लेना हो गया मुश्किल शहर में अब,
खोल खिड़की कुछ तो ताजा सी हवा दे दे।
छोड़ दुनिया अब  यहां से दूर जाना है,
बेसहारा शख्स को तू इक दुआ दे दे।
मौत के आसार बनते से जरा सोचो,
सुन तबीबों अब मुझे कोई दवा दे दे।
तू है मुन्सिफ हाथ तेरे जिन्दगी मेरी,
कर रहम हक में मेरे तू फैसला दे दे।
राह मुश्किल दूर मन्जिल हाल खस्ता है,
चैन मिल जाये कहे रैना"क़ज़ा दे दे। रैना""

सोमवार, 7 अगस्त 2017

शराबी बेटा बवाल करता,
बाप नेता संभाल करता,
बंद करो बेटी बचाओ अभियान,
कोई न बेटी का ख्याल करता। रैना"

रविवार, 6 अगस्त 2017

मित्रता दिवस पे ख़ास

भूले हुये वो यार फिर क्यों याद आते हैं,
वो याद आ कर दिल जलाते क्यों सताते है,
मेरे खुदा तू ही बता क्या दे सज़ा उनको,
जो यार की ही जिन्दगी दोज़ख बनाते हैं। रैना"          

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

दोस्तों की जय जय

दिल के बदले दिल का मिलना,
अब मुश्किल है गुल का खिलना।
उल्फत की राहों पे फिसलन,
चलना तो सम्भल के चलना।
बेशक तय उस नगरी जाना,
मस्ती से जी छोड़ो डरना।
रैना"की हसरत ये मकसद,
मरना है कुछ करके मरना। रैना"

बुधवार, 2 अगस्त 2017


दोस्तों देखना जी

मन्जिल तू ही साहिल है,
फिर क्यों भटके ये दिल है।
शिकवा तुझसे क्या करना,
सब कुछ तुम से हासिल है।
तेरे चर्चे महफ़िल में,
बेशक तू ही काबिल है।
हमने इतना जाना है,
तू जीवन में शामिल है।
अदला बदली कर सकता,
तुझको रुतबा हासिल है।
क्या ढूंढे बेगानों में,
अपना ही वो कातिल है।
कहते है ये जग वाले,
"रैना"सनकी पागल है। रैना"

सोमवार, 31 जुलाई 2017

दोस्तों कुछ ख़ास

जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी।
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में यूं जला आदमी।
दूर तक है नज़र दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
आंख हैरान थी जब खुली,
आदमी ने छला आदमी।
दूरिया कम नहीं बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार कह के चले,
कर गया यूं गिला आदमी।
है दुःखी घर बसा छोड़ कर,
फिर सफर पे चला आदमी।
रैन लाचार है क्या करे,
मतलबी हो गया आदमी। रैना"

रविवार, 30 जुलाई 2017

मिट्टी के घर को सजाया न गया,
खुद को ही खुद से बचाया न गया,
वादा किया था मगर याद न रहा,
महबूब से दिल लगाया न गया।रैना" 



गुरुवार, 27 जुलाई 2017

दोस्तों दिल से पढ़ना

अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते है दगा देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते है फ़रिश्तें अब तो,
है कहां मिलती वफ़ा देखो।
दर्द अपने ही तुझे देंगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बन्दगी में जब लगे दिल है,
जिन्दगी में तब मज़ा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में है,
रिन्द होते हैं फ़ना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई हो,
मौत ही "रैना"सजा देखो। रैना"" 

रविवार, 23 जुलाई 2017


देश भक्त चन्द्रशेखर आजाद को समर्पित

हर दिल में आबाद था आबाद ही रहा है,
चन्द्रशेखर आजाद था आजाद ही रहा है,
चम्मचों चापलूसों को नसीब हो कुर्सियां,
देश भक्त तो बरबाद था बरबाद ही रहा है। रैना"

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

जिन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं,
इस सजा से मगर गिला ही नहीं।
है यही दर्द 

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017


शब्द सरिता आयोजन 61
गुरुवार 13-7-2017
विशिष्ट अतिथि आदरणीय प्रबोध मिश्र हितैषी सर जी
आ रतन राठौड़ जी
आ सोनिया गुप्ता जी 
आ वसुधा कनुप्रिया जी एवं मंच को प्रेषित
अरे भारत ! उठ ऑखे खोल,
रहा दुश्मन अब बाजूं तोल। 
जिक्र सारे जग में तेरा हो,
लगा अपने जीवन का मोल। 
निभा अपना वो वादा खास,
नहीं अच्छे अब लगते बोल।
रहे कायम बस तेरी याद,
निभा ऐसा तू कोई रोल। 
चले रैना जब बस्ती छोड़,
कहे सब था हीरा अनमोल। रैना"


गुरुवार, 13 जुलाई 2017


सो रहा तान कर क्यों भला किसलिये,
जोश जो था रगों में ढ़ला किसलिये,
वक़्त अब भी तेरा तू कदम तो बढ़ा,
तोड़ कर हौसला तू डरा किसलिये।नीलू"



बुधवार, 12 जुलाई 2017

देखो तो हम मजबूर होने लगे है,
जिनसे लगाई  दूर होने लगे है। रैना"

मंगलवार, 11 जुलाई 2017

वो गौर नहीं करते,
हम जोर नहीं करते,
है दर्द बहुत दिल में,
पर शोर नहीं करते।
हमराज हवा ठण्डी,
इस ओर नहीं करते।
ये इश्क सुना हमने,
कमजोर नहीं करते।
जो हाल किया तूने,
यूं चोर नहीं करते।
इस दौर के कवि रैना",
यूं बौर नहीं करते।रैना"