मित्रता दिवस पे ख़ास
भूले हुये वो यार फिर क्यों याद आते हैं,
वो याद आ कर दिल जलाते क्यों सताते है,
मेरे खुदा तू ही बता क्या दे सज़ा उनको,
जो यार की ही जिन्दगी दोज़ख बनाते हैं। रैना"
भूले हुये वो यार फिर क्यों याद आते हैं,
वो याद आ कर दिल जलाते क्यों सताते है,
मेरे खुदा तू ही बता क्या दे सज़ा उनको,
जो यार की ही जिन्दगी दोज़ख बनाते हैं। रैना"
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