सोमवार, 5 अगस्त 2013

wah kya khub

दोस्तों इसे भी देखे प्यार से

वाह क्या खूब अन्दाज उनके,
नाक पे मख्खी नही बैठने देते।
हो गये है खफा हम से इस कद्र,
अब हमारा नाम भी तो नही लेते।
गुस्ताखी हो गई इक बार हमसे,
मेरे कुचे में ही आना छोड़ दिया,
तरस आया नही मेरे इस हाल पे,
गुंचे के मान्निद दिल तोड़ दिया।
ऐ खुदा हम तुझसे ये अर्ज करते है,
तू ही उन्हें बता हम उन पे मरते है। राजेन्द्र रैना"गुमनाम"  

रविवार, 4 अगस्त 2013

sath rhta magr bolta nhi

साथ रहता पर बोलता नही,
राज दिल के क्यों खोलता नही।
चेहरे से चिलमन हटा कभी,
आंख भर के क्यों देखता नही।
यूं कहे तुझसे मैं जुदा नही,
पास मेरे तू बैठता नही।
बात "रैना" की मान ले कभी,
बिन तिरे जीवन महकता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी.…………जय जय मां ।


dosti to hai

दोस्तों देखना ये रचना कहां तक सही है

दोस्ती तो है मगर किताबों में,
तंगी में दोस्त मिलते ख्वाबों में।
इस जमाने ने अब तौर बदला,
दोस्ती घुल मिल गई शराबों में।
कृष्ण से पूछता सुदामा क्यों अब,
दोस्ती का फूल न खिले बागों में।
जो दोस्ती की चमक बराबर रखे,
उल्फत का तेल न इन चिरागों में।
रैना"मत कर अब दोस्ती की बातें,
खो जा फिर से उन पुरानी यादों में। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

    

dosti ki bqate

दोस्ती दिवस पर खास पेशकश

मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 
 

शनिवार, 3 अगस्त 2013

ye bta mai tujhe

रविवार विशेष ग़ज़ल दोस्तों के लिए

ये बता मैं तुझे यूं भुलाऊ कैसे,
जिन्दगी को नरक अब बनाऊ कैसे।
चश्म में अक्स तेरा बसे तू दिल में
याद तेरी यहां से हटाऊ कैसे।
बिन तिरे हर तरफ है दरद तन्हाई,
बेदर्द मौत खुद को बचाऊ कैसे।
दोस्तों से गिला हम करे भी तो क्या,
हाल दिल का किसी को सुनाऊ कैसे।
अब मसीहा नही है भरोसे काबिल,
आइना भेडियों को दिखाऊ कैसे
सोचता रैन" दिन हर घड़ी हरपल मैं,
दाग दिल पे लगे अब मिटाऊ कैसे। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"  

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

aakhir kya teri

दोस्तों यार को समर्पित ये ग़ज़ल

आखिर क्या वो मजबूरी है,
हमसे क्यों इतनी दूरी है।
हम मुफ़्लिस दीवाने तेरे,
तू दानी की मशहूरी है।
क्या बरपा तेरी बस्ती में,
हर मुखड़ा अब बेनूरी है।   
खाने दे मुझको जी भर के,
मां के हाथों की चूरी है।
रैना"सोचे दिन कब निकले,
जिंदगी हो जाती पूरी है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी  …  जय जय मां  

bismal

दोस्तों के नाम छोटी बहर की ग़ज़ल

बिस्मिल मिरा ये दिल,
जीना हुआ मुश्किल।
वो जान का दुश्मन,
है गाल पे जो तिल।
यूं देख कर हालत,
खिल खिल हंसे कातिल।
वो दरद आहें आंसू,
है इश्क में हासिल।
मझदार में भटके,
है दूर वो साहिल।
गर चाह कुरसी की,
"गुमनाम" हो जाहिल। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"