सोमवार, 31 जुलाई 2017

दोस्तों कुछ ख़ास

जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी।
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में यूं जला आदमी।
दूर तक है नज़र दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
आंख हैरान थी जब खुली,
आदमी ने छला आदमी।
दूरिया कम नहीं बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार कह के चले,
कर गया यूं गिला आदमी।
है दुःखी घर बसा छोड़ कर,
फिर सफर पे चला आदमी।
रैन लाचार है क्या करे,
मतलबी हो गया आदमी। रैना"

रविवार, 30 जुलाई 2017

मिट्टी के घर को सजाया न गया,
खुद को ही खुद से बचाया न गया,
वादा किया था मगर याद न रहा,
महबूब से दिल लगाया न गया।रैना" 



गुरुवार, 27 जुलाई 2017

दोस्तों दिल से पढ़ना

अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते है दगा देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते है फ़रिश्तें अब तो,
है कहां मिलती वफ़ा देखो।
दर्द अपने ही तुझे देंगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बन्दगी में जब लगे दिल है,
जिन्दगी में तब मज़ा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में है,
रिन्द होते हैं फ़ना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई हो,
मौत ही "रैना"सजा देखो। रैना"" 

रविवार, 23 जुलाई 2017


देश भक्त चन्द्रशेखर आजाद को समर्पित

हर दिल में आबाद था आबाद ही रहा है,
चन्द्रशेखर आजाद था आजाद ही रहा है,
चम्मचों चापलूसों को नसीब हो कुर्सियां,
देश भक्त तो बरबाद था बरबाद ही रहा है। रैना"

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

जिन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं,
इस सजा से मगर गिला ही नहीं।
है यही दर्द 

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017


शब्द सरिता आयोजन 61
गुरुवार 13-7-2017
विशिष्ट अतिथि आदरणीय प्रबोध मिश्र हितैषी सर जी
आ रतन राठौड़ जी
आ सोनिया गुप्ता जी 
आ वसुधा कनुप्रिया जी एवं मंच को प्रेषित
अरे भारत ! उठ ऑखे खोल,
रहा दुश्मन अब बाजूं तोल। 
जिक्र सारे जग में तेरा हो,
लगा अपने जीवन का मोल। 
निभा अपना वो वादा खास,
नहीं अच्छे अब लगते बोल।
रहे कायम बस तेरी याद,
निभा ऐसा तू कोई रोल। 
चले रैना जब बस्ती छोड़,
कहे सब था हीरा अनमोल। रैना"


गुरुवार, 13 जुलाई 2017


सो रहा तान कर क्यों भला किसलिये,
जोश जो था रगों में ढ़ला किसलिये,
वक़्त अब भी तेरा तू कदम तो बढ़ा,
तोड़ कर हौसला तू डरा किसलिये।नीलू"



बुधवार, 12 जुलाई 2017

देखो तो हम मजबूर होने लगे है,
जिनसे लगाई  दूर होने लगे है। रैना"

मंगलवार, 11 जुलाई 2017

वो गौर नहीं करते,
हम जोर नहीं करते,
है दर्द बहुत दिल में,
पर शोर नहीं करते।
हमराज हवा ठण्डी,
इस ओर नहीं करते।
ये इश्क सुना हमने,
कमजोर नहीं करते।
जो हाल किया तूने,
यूं चोर नहीं करते।
इस दौर के कवि रैना",
यूं बौर नहीं करते।रैना" 



दोस्तों गौर करना
दीप मन में जब जलेगें,
तब चमन में गुल खिलेगें।
राह मुश्किल ही नहीं है,
ठान कर जब हम चलेगें।
अब कदम चल ही दिये हैं,
जा मंजिल पे ही थमेंगें।
क्यों नसीबों से गिला है,
करम से ही सुख मिलेगें।
सोच रैना  रात होगी,
यार से मिल क्या कहेगें। रैना"

दोस्तों के लिए
तू खुद से मत धोखा करना,
अपने घर का मौका करना।
इस दिल भटके बाजारों में,
अच्छा इसको टोका करना
हिम्मत से जीवन निखरे है,
तू गम से समझौता करना।
रैना  किस्मत तो बदलेगी,
यूं दिल मत छोटा करना। रैना"

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

रात भर रोने की सज़ा दे गया,
वो गमों को घर का पता दे गया,
लोग हैं गफ़लत में यहां के सरे,
कौन किसको क्यों है दगा दे गया। रैना"

मंगलवार, 4 जुलाई 2017



शब्द चुनौती आयोजन 60/मंगलवार/4जुलाई2017
विशिष्ट अतिथि आदरणीय Arun Sharma जी
आयोजन अध्यक्ष आदरणीया Rekha Joshi जी
आयोजन संचालक आदरणीय Vishal Narayan जी
एवं आदरणीया दी वसुधा कनुप्रिया जी तथा मंच को सादर निवेदित------------
प्रद्त शब्द--आपदा आपद विपत्ति आफत समानार्थी ।

यहां आफत वहां आफत बचेंगे हम भला कैसे,
बड़ी मुशिकल सी राहें है चलेंगे हम भला कैसे,
यही अफ़सोस रैना को तमन्ना फिर अधूरी है,
महेंदी नाम के रंग की रचेंगे हम भला कैसे। रैना"

रविवार, 2 जुलाई 2017

यही कुछ बोलते खण्डर ज़रा चलना संभल के तुम,
पड़े जब वक़्त की लाठी नहीं सालिम रहे कोई। रैना"

न रिश्तों से शिकायत है जमाना हो गया ऐसा,
ठिकाना दिल करे बदली नये इस दौर का फैशन।रैना"