दोस्तों कुछ ख़ास
जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी।
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में यूं जला आदमी।
दूर तक है नज़र दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
आंख हैरान थी जब खुली,
आदमी ने छला आदमी।
दूरिया कम नहीं बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार कह के चले,
कर गया यूं गिला आदमी।
है दुःखी घर बसा छोड़ कर,
फिर सफर पे चला आदमी।
रैन लाचार है क्या करे,
मतलबी हो गया आदमी। रैना"
जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी।
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में यूं जला आदमी।
दूर तक है नज़र दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
आंख हैरान थी जब खुली,
आदमी ने छला आदमी।
दूरिया कम नहीं बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार कह के चले,
कर गया यूं गिला आदमी।
है दुःखी घर बसा छोड़ कर,
फिर सफर पे चला आदमी।
रैन लाचार है क्या करे,
मतलबी हो गया आदमी। रैना"