काश वो अब मान जाये,
दर्द मेरा जान जाये।
बेवफा को क्या कहे अब,
शाम ढलती जान जाये।"रैना"
दोस्तों के लिए एक खास पेशकश
होसलें खुद ही बढ़ाने होगें,
रास्तें हम को बनाने होगें।
हर किसी को कब मिले ये मंजिल,
लोग जो गिरते उठाने होगें,
कब अकेला तोड़ सकता पत्थर,
अब कदम मिल के बढ़ाने होगें।
ये मसीहा देश के दुश्मन है,
रास्तें से ये हटाने होगें।
घोर अन्धेरा लगे डर देखो,
दीप मन में अब जलाने होगें।
तोड़ मत दिल जिन्दगी बाकी है,
और जीने के बहाने होगें।
दाग दिल पे जो लगे हैं"रैना"
वक्त के हाथों मिटाने होगें। ...."रैना"