sufi tadka
बुधवार, 9 मई 2012
janwar baasul
जानवर बा असूल है,
आदमी बे असूल है,
रैना नही बना,
जानवर हो कबूल है।
जानवर का मिजाज ये,
बावफा
आदमी
फर्क क्या
आदमी
फिर भी कहे इन्सान
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