शनिवार, 5 मई 2012

dekh duri ko

published on dated on dated 4jan 2012
देख दूरी को परेशान न हुआ करते,
रास्ते कब आँख झपके ही बना करते।
हर किसी की हो दुआ मंजूर नामुमकिन,
हाथ लाखों ही दुआ को है उठा करते।
पहुंच मंजिल पे रुका करते कदम देखो,
दिल जले आशिक नही पहले रुका करते।
जो दुखी करता गरीबों बेसहारा को,
सच उसी घर में चिराग नही जला करते।  "रैना"

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