हैं कहर गुजारे लोगों ने मौका लगते ही वार किया,
उसके हिस्से में रुसवाई जिसने भी सच्चा प्यार किया,
अब सच बेबस लाचार हुआ बेशक कडवी सच्चाई है,
उसको धोखा ही मिलता है जिसने भी है एतबार किया
।जीते जी तो की कद्र नही बूढ़े पानी को तरसें है,
मरने पर देखों बेटों ने देशी घी से सत्कार किया।............रैना"
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