मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

देखना दोस्तों
माफ़ मेरी तू सज़ा कर दे,
नाम मेरे अब क़ज़ा कर दे।
दर्द सहना हो रहा मुश्किल,
सुन तबीबो अब दवा कर दे।
बन्द दरवाज़े नही खुलते,
खोल खिड़की को हवा कर दे।
तू बसे मन में यकीं मुझको,
दोस्ती का हक़ अदा कर दे।
गम कहर करता रहा अक़्सर,
जिन्दगी को ख़ुशनुमा कर दे।
हो हकीकत ख़्वाब तेरा तब,
साथ खुद के जो वफ़ा कर दे।
फिर चिंता कोई न हो रैना"
गम को दिल से जो जुदा कर दे। रैना"

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