मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

जय जय माँ जय जय माँ
भूल कर भी तुझे भूलना मुश्किल,
हर अदा कर रही है कहर दिल पे।
क्या कभी सामने आ के बैठे गा,
और कुछ तू सुनेगा कहेगा कुछ।
काश तुझको मेरा ख्याल आये जो,
रैन काली छटे चांदनी हो तब,
क्या कभी तू करेगा मेरे खातिर।
कर्म इतना मुझे तब सकूं मिलना।
ख़त्म तू कर अभी बीच की दूरी,
है तलब दीद की सुन मेरी विनती।
चैन रैना" तभी मिल सके  तुझको,
बैठ संग उसके कर चार वो बातें। रैना"
सुप्रभात जी ---------जय जय माँ 

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