sufi tadka
बुधवार, 11 जनवरी 2017
साथ रहता है मगर मिलता नही,
फूल मेरे मन का खिलता नही।
जख्म दिल पे है लगे हम क्या करे,
क्यों तबीबो जख्म वो सिलता नही। रैना"
तबीबो =डाक्टर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें