sufi tadka
रविवार, 29 जनवरी 2017
साथ रहता गम ख़ुशी है दूर रहती,
है परेशां जिन्दगी मजबूर रहती,
खेलती तो खेल किस्मत सच यही है,
बदनसीबों की गली मशहूर रहती। रैना"
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