मंगलवार, 17 जनवरी 2017

यहां बहुत है तलवे चाटने वाले,
नेता बन जाओ चाहे अनपढ़ ही सही। रैना"

याद आ रहे है स्कूल के दिन,
मास्टर के बीमार होने की दुआ मांगते थे। रैना"

मासूम बचपन पंख लगा के उड़ गया,
जवानी बाज के जैसे फड़फड़ाती रही,
अब समझ आने  लगा राजे जिंदगी,
बुढ़ापा बूढ़े बैल के जैसे धीरे धीरे जा रहा। रैना"

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