sufi tadka
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
hamne ujhe dil me baithha
अरमानो से ही बाग़ सजाया है,
हमने तुझको दिल में बैठाया है.
सारी शब फिर तो नींद नही आई,
तू जब मेरे सपने में आया है.
तुझ पे इल्जाम लगाऊ तो कैसे,
वैसे तूने दिल मेरा चुराया है
कल तक तो था "रैना"तेरा अपना,.
आज भला क्यों हो चला पराया है......"रैना"
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