हमें आपका जो सहारा न होता
मुहब्बत का हमको नज़ारा न होता
अगर तुम न हो रहनुमा जो हमारे,
ज़माने में अपना गुज़ारा न होता
तेरी दोस्ती ग़र न होती जो हासिल,
अर्श पे चमकता सितारा न होता।
जले इश्क की आग में जो मरे हैं,
बेशक जन्म उनका दुबारा न होता।
सदाकत की जो राह मुश्किल बड़ी है,
जमाने को सच तो गवारा न होता।
न नीलू" कभी हो दुःखी इस तरह से,
अगर हमनवा ने यूं मारा न होता।नीलू"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें