ये बढ़ती दूरियां घटाने की बात करे,
मिल बैठ मसले सुलझाने की बात करे.
सुबह की रंगोली और गीतों भारी शाम,
आओ फिर वो माहौल बनाने की बात करे,
किस्मत के मारे जो गिर गये है राहों में,
उन बेचारों लाचारों को उठाने की बात करे,
बल्ब जल रहे फिर भी घोर अँधेरा लगता,
आओ दिल के चिराग़ जलाने की बात करे.
देखिये तो हर तरफ दुर्गन्ध का आलम है,
अब वातावरण को महकाने की बात करे.
जिनकी आँखों पे चढ़ गेई है चर्बी देखों,
आओ उन्हें आइना दिखाने की बात करे
जो और बिखरे तो संभल नही पाए गे यारों
गिले शिकवे भूल एक हो जाने की बात करे.
बेवजह जो भटक गये है अपनी राहों से,
मान जाये गे उन्हें समझाने की बात करे.
वो हर जगह मौजूद हर शै में नूर उसका,
फिर भला क्यों मस्जिद,बुतखाने की बात करे.
बहुत रो लिये अब तो सुख गये है आंसूं देखो,
अब तो पागल "रैना" को हँसाने की बात करे.
राजिंदर "रैना"
मंगलवार, 30 नवंबर 2010
सोमवार, 29 नवंबर 2010
रेत के घर
उदास मन को कुछ ऐसे बहलाते है,
रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.
इश्क में तो हासिल होती रुसवाई,
समझदार लोग तो यही बताते है.
वो ही सुने गा तेरी फरियाद "रैना"
छोड़ सबको हम उसके घर जाते है.
राजिंदर "रैना"
रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.
इश्क में तो हासिल होती रुसवाई,
समझदार लोग तो यही बताते है.
वो ही सुने गा तेरी फरियाद "रैना"
छोड़ सबको हम उसके घर जाते है.
राजिंदर "रैना"
महफ़िल से अब तो नजारें चले गये,
दुःख सुख बाटतें थे वो प्यारे चले गये.
पर सुख की खोज को जंगल में भटकने,
दशरथ की आँखों के तारें चले गये.
मेरे दर्दे दिल की सुनी नही सदा,
हम उन्हें निरंतर पुकारे चले गये.
हादसे ने छीना बूढ़े की लाठी को,
बिलखता रोये बाप सहारे चले गये.
दिन निकला सारा आलम बदला,
अर्श तन्हा छोड़ सितारें चले गये.
किस्मत ने कई बार धोखा दिया,
फिर भी जिन्दगी सवारें चले गये.
"रैना" अब तो मिलने की आश छोड़ दी,
हम से रूठ के दोस्त हमारे चले गये.
राजिंदर "रैना"
दुःख सुख बाटतें थे वो प्यारे चले गये.
पर सुख की खोज को जंगल में भटकने,
दशरथ की आँखों के तारें चले गये.
मेरे दर्दे दिल की सुनी नही सदा,
हम उन्हें निरंतर पुकारे चले गये.
हादसे ने छीना बूढ़े की लाठी को,
बिलखता रोये बाप सहारे चले गये.
दिन निकला सारा आलम बदला,
अर्श तन्हा छोड़ सितारें चले गये.
किस्मत ने कई बार धोखा दिया,
फिर भी जिन्दगी सवारें चले गये.
"रैना" अब तो मिलने की आश छोड़ दी,
हम से रूठ के दोस्त हमारे चले गये.
राजिंदर "रैना"
सोमवार, 15 नवंबर 2010
बुधवार, 10 नवंबर 2010
रविवार, 7 नवंबर 2010
mai teri rja vich
mai ta teri rja vich raji,
bhave bna de bhave mita de,
bhave jis hal rkho mere shaji.
mai ta teri rja vich raji.......
ha raji mai ta teri rja vich raji-----------
bhave bna de bhave mita de,
bhave jis hal rkho mere shaji.
mai ta teri rja vich raji.......
ha raji mai ta teri rja vich raji-----------
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