क्यों बिना बात तू मुस्कराता बहुत है,
दर्द दिल का भला क्यों छुपाता बहुत है।
आज का आदमी ख़ास चाहे किये बिन,
इसलिये खुद को अच्छा दिखाता बहुत है।
तोल कर बोलना बेवजह लब न खोले,
जख्म बातों का दिल को रुलाता बहुत है।
चोर मन में तेरे बस गया यूं लगे है,
तू तभी हम से नजरें चुराता बहुत है।
रख भरोसा तेरा दिल न फिर हार माने,
ये हुनर काम जिंदगी में आये बहुत है।
दर्द दिल का भला क्यों छुपाता बहुत है।
आज का आदमी ख़ास चाहे किये बिन,
इसलिये खुद को अच्छा दिखाता बहुत है।
तोल कर बोलना बेवजह लब न खोले,
जख्म बातों का दिल को रुलाता बहुत है।
चोर मन में तेरे बस गया यूं लगे है,
तू तभी हम से नजरें चुराता बहुत है।
रख भरोसा तेरा दिल न फिर हार माने,
ये हुनर काम जिंदगी में आये बहुत है।
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