दर्द दफ़न है दिल के तहखाने में.
करीब साहिल के मेरी कश्ती डूबी,
मुझ सा बदनसीब नही कोई जमाने में.
इस से बुरा और भला क्या होगा,
तबीबो ने जख्म दिया दवाखाने में.
रो रो कर के भी सच नही कहते,
लोग माहिर है अब राज छुपाने में.
वो फिर भी है मेरे ख्वाबों में आते,
उमर गुजारी है जिन्हें भुलाने में.
मुझे देख कर वो हंस के बोले,
मजा आता है तुम्हे सताने में.
पीने वालो जरा संभल के पीना,
जहर बिकता है अब मयखाने में.
तलब थी तुझे आखिरी बार देखू,
मगर देर कर दी तूने आने में.
तड़फ परवाने की तो वही जाने,
"रैना"मजा आता खुद कों मिटाने में. "रैना"
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