गुरुवार, 20 जनवरी 2011

उनसे बिछुड़े पलकों  को न बिगोया है,
मगर दिल चुपके चुपके  बहुत रोया है.
दागे इश्क बाद मुद्दत भी  नही छूटे,
दिल को कई बार अश्कों से धोया है.
मै भी सोये  नसीब को जगा लेता,
जगाऊ कैसे वो जागता हुआ सोया है.
इश्क में कुछ भी तो नही  हासिल,
दिल का आराम चैन उल्टा खोया है.
आज फिर उनकी याद  चली आई,
"रैना" तन्हा बैठ के खूब रोया है
    राजेंदर "रैना"

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