रविवार, 27 मार्च 2011

भटका मै राहों से करता न कोई गौर हूँ,
मंजिल कहीं  और जा रहा कहीं और हूँ."रैना"

बुधवार, 16 मार्च 2011

handam dost

तूने इस कदर मेरे दिल का शहर वीरान बनाया है,


जैसे दो मिनट के जलजले ने जापान को मिटाया है.

तेरे ख्यालात मेरे हालात फिर भी नही बदले,

यूँ तो मैंने कई बार अश्कों का दरिया बहाया है.

वो देते रहे मुझे मरने की बददुआ अक्सर,

दुआओं का असर खुदा ने फिर भी न उठाया है.

आधी रात से मेरा दिल बेचैन कही न लगता,

बेवफा बेदर्द जालिम जब से ख्वाब में आया है.

रैना को यही अफ़सोस खुद से शिकवा यारों,

उसने इक फरेबी को हमदम दोस्त बनाया है. "रैना"

शनिवार, 5 मार्च 2011

काश आशिक का रुतबा हासिल हो जाये,
मेरा दिल तेरे इश्क में पागल हो जाये.
तब तो  रहती नही है होश भी अपनी,
जब  दिल तीरे नजर से घायल हो जाये. "रैना"