तूने इस कदर मेरे दिल का शहर वीरान बनाया है,
जैसे दो मिनट के जलजले ने जापान को मिटाया है.
तेरे ख्यालात मेरे हालात फिर भी नही बदले,
यूँ तो मैंने कई बार अश्कों का दरिया बहाया है.
वो देते रहे मुझे मरने की बददुआ अक्सर,
दुआओं का असर खुदा ने फिर भी न उठाया है.
आधी रात से मेरा दिल बेचैन कही न लगता,
बेवफा बेदर्द जालिम जब से ख्वाब में आया है.
रैना को यही अफ़सोस खुद से शिकवा यारों,
उसने इक फरेबी को हमदम दोस्त बनाया है. "रैना"