जिसके दम से दुनिया सारी,
ममता प्रेम की भरी पिटारी,
कहने को तो प्रथम है महिला,
फिर भी नारी गम की मारी।
हाथ फैलाये खड़ी बेचारी। रैना"
तलब लगी माँ तलब लगी,
तेरे दर्शन की तलब लगी,
तलब लगी माँ ऐसी लगी,
बिलकुल ध्यानू के जैसे लगी।
तलब लगी माँ तलब,
दे दे दर्शन माँ मुझको अभी।
तलब लगी माँ ---------रैना"
इधर उधर न भागा करो,
अपने अन्दर खोजा करो।
यहां वहां फिर दुःख पाओगे,
सदा बुरे कर्मों से तौबा करो।
नारी बेचारी,गम की मारी,
कहने को है आधी आबादी,
होने लगी अब कमी भारी।
अपने प्यारे दोस्तों की शान में
वफ़ा तो नाम है मेरा मेहनत मेरी दौलत है,
गम को हंस के सहना अपनी पुरानी आदत है,
कुछ पाने के लिये रैना"कुछ खोना भी पड़ता है,
राह पड़ी किसी को कभी न मिलती शौहरत है। रैना"
बेशक हमें दूर है जाना,
रास्ता बहुत मुश्किल है,
किसी को
मेरी बातों पे सिर्फ यक़ीं करना सोचने की जरूरत नही है,
बात कह कर पलट जाये रैना"ऐसी तो कोई सूरत नही है। रैना"